CBSE On-Screen Marking Tender Controversy: CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग टेंडर विवाद में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए CBSE चेयरमैन और सचिव का ट्रांसफर कर दिया है। साथ ही पूरे मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है।
देश की सबसे बड़ी शिक्षा संस्थाओं में से एक CBSE को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। केंद्र सरकार ने CBSE के चेयरमैन और सचिव का तबादला कर दिया है। इसके साथ ही ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सेवाओं की खरीद प्रक्रिया की जांच के लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया है।
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब CBSE द्वारा दिए गए एक महत्वपूर्ण टेंडर को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। आरोप लगाए जा रहे हैं कि टेंडर प्रक्रिया में कुछ नियमों में बदलाव किए गए, जिससे एक विशेष कंपनी को फायदा पहुंचा।
कैबिनेट सचिवालय ने इस पूरे मामले की जांच के लिए एक सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता एस. राधा चौहान करेंगी, जो वर्तमान में क्षमता निर्माण आयोग (Capacity Building Commission) की अध्यक्ष हैं।
समिति को यह जांच करने की जिम्मेदारी दी गई है कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग सेवाओं के लिए टेंडर जारी करते समय सभी प्रक्रियाओं का सही तरीके से पालन किया गया था या नहीं। समिति को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी।
ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) एक डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली है, जिसके माध्यम से उत्तर पुस्तिकाओं की जांच ऑनलाइन की जाती है। इसका उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और अधिक प्रभावी बनाना है।
हालांकि हाल के दिनों में इसी प्रणाली से जुड़े टेंडर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
विवाद के केंद्र में CoEm EduTech नाम की कंपनी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह कंपनी पहले ग्लोबरेना (Globarena) नाम से जानी जाती थी। आरोप है कि कंपनी को टेंडर देने के दौरान कुछ शर्तों में बदलाव किए गए।
इसी मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर सवाल उठाए गए। बाद में यह मामला राजनीतिक और संसदीय स्तर तक पहुंच गया।
हालांकि अभी तक किसी भी प्रकार की अनियमितता आधिकारिक रूप से साबित नहीं हुई है और जांच समिति की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
इस पूरे मामले की सबसे दिलचस्प बात यह रही कि कुछ छात्रों ने खुद टेंडर से जुड़े दस्तावेजों का अध्ययन कर कथित अनियमितताओं की ओर ध्यान आकर्षित किया।
इन छात्रों द्वारा जुटाई गई जानकारियों ने मामले को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया। इसके बाद शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर नई बहस शुरू हो गई।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई केवल शुरुआत हो सकती है। सरकार पूरे मामले की तह तक जाना चाहती है और यदि जांच में किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है तो आगे भी कार्रवाई की जा सकती है।
सरकार का मानना है कि छात्रों के भविष्य से जुड़ी किसी भी व्यवस्था में पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
विवाद के बीच कई छात्रों ने CBSE के ऑनलाइन पोर्टल में तकनीकी दिक्कतों की शिकायत भी की है। कुछ छात्रों का कहना है कि वे अपनी शिकायतें दर्ज कराने या उत्तर पुस्तिकाओं से संबंधित सेवाओं तक पहुंचने में परेशानी महसूस कर रहे हैं।
CBSE ने कुछ मामलों में साइबर हमलों की आशंका भी जताई है, लेकिन कई छात्र अभी भी समाधान का इंतजार कर रहे हैं।
मामले को लेकर विपक्षी दलों ने भी सरकार और शिक्षा मंत्रालय से जवाब मांगा है। विपक्ष का कहना है कि यदि जांच में अनियमितताएं साबित होती हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
इस मुद्दे ने शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और परीक्षा प्रबंधन को लेकर नई बहस को जन्म दिया है।
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