US Iran naval conflict: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच श्रीलंका के पास अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में अमेरिकी सबमरीन ने ईरानी नेवी जहाज को टॉरपीडो से निशाना बनाया। इस हमले में 80 से अधिक नाविकों की मौत की खबर सामने आई है।
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच हिंद महासागर क्षेत्र में एक बड़ा सैन्य घटनाक्रम सामने आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार श्रीलंका के दक्षिण में अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की एक सबमरीन ने ईरानी नौसेना के एक युद्धपोत को टॉरपीडो से निशाना बनाया।
इस हमले में लगभग 80 से 100 ईरानी नाविकों की मौत की आशंका जताई जा रही है। यह घटना उस समय हुई जब ईरानी जहाज हाल ही में भारत में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास में हिस्सा लेकर लौट रहा था।
जानकारी के अनुसार ईरान का यह युद्धपोत भारत में आयोजित मल्टीलैटरल नेवल एक्सरसाइज ‘मिलन 2026’ में भाग लेने आया था।
यह अभ्यास विशाखापट्टनम में आयोजित किया गया था जिसमें 70 से अधिक देशों की नौसेनाओं ने हिस्सा लिया था। अभ्यास समाप्त होने के बाद ईरानी जहाज वापस लौट रहा था, उसी दौरान यह हमला हुआ।
अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के अनुसार यह हमला अमेरिकी नौसेना की एक सबमरीन द्वारा किया गया। बताया जा रहा है कि जहाज को टॉरपीडो से निशाना बनाया गया, जिससे वह कुछ ही समय में डूब गया।
रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार अमेरिकी सबमरीन द्वारा इस प्रकार का टॉरपीडो हमला किया गया है।
यह घटना श्रीलंका के गॉल (Galle) शहर से लगभग 80 किलोमीटर दक्षिण में अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में हुई बताई जा रही है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि यह हमला न तो भारतीय समुद्री सीमा में हुआ और न ही श्रीलंका के क्षेत्रीय जल में। इसलिए इसे दो देशों के बीच सैन्य कार्रवाई माना जा रहा है।
यह घटना भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि:
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे हिंद महासागर में सुरक्षा और नौसैनिक निगरानी को और मजबूत करने की जरूरत महसूस हो सकती है।
फिलहाल भारत सरकार की ओर से इस घटना पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि भारत इस मामले में तटस्थ रुख बनाए रख सकता है।
भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय विवादों में शांति और कूटनीतिक समाधान की वकालत करता रहा है।
श्रीलंका के पास हुई यह घटना हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव की ओर इशारा करती है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब मध्य पूर्व से आगे बढ़कर समुद्री क्षेत्रों तक पहुंचता दिख रहा है।
भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह इस तनाव के बीच अपनी समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन बनाए रखे।
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